Q2 of 10 Page 115

संदर्भ-सहित व्याख्या कीजिएः

क) अपने पतझर के सपनों का


मैं भी जग को गीत सुनाता


ख) गाता शुक जब किरण बसंती


छूती अंग पर्ण में छनकर


ग) हुई न क्यों मैं कड़ी गीत की


बिधना यों मन में गुनती है

) इन पंक्तियों के माध्यम से गुलाब की व्यथा का वर्णन किया गया है गुलाब कहते है कि अगर मुझे भी आवाज दी होती है तो मैं भी पतझड़ के सपनों का गीत संसार को सुनाता| यहाँ गुलाब के पास आवाज न होने के कारण उसके अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त न कर पाने के बारे में बताया गया है|


) कवि कहता है कि प्रकृत्ति का असर पशु पक्षियों पर भी पड़ता है। जब सूर्य की किरणें पत्तों से छनकर तोते पर पड़ती है तो वह प्रसन्न होकर गाने लगता है। उसका गीत सुनकर मादा तोता भी गाना चाहती है। लेकिन उसका गीत सिर्फ प्यार में खोकर रह जाता है।


) इन पंक्तियों में कवि प्रेमिका के मन की पीड़ा को बयां कर रहा है। जब प्रेमी प्रकृत्ति को देख खुश होता है तो वो गीत गाने लगता है। उसकी आवाज प्रेमिका के कानों में पड़ती है तो वो उसके पास जा पहुंचती है। वो छुपकर अपने प्रियतम को गाते हुए सुनती है फिर वो सोचती है कि मैं इस गीत में क्यों शामिल नहीं हो पाई।


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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

मनुष्य को प्रकृति किस रूप में आंदोलित करती है? अपने शब्दों में लिखिए।

1

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

सभी कुछ गीत, अगीत कुछ नहीं होता। कुछ अगीत भी होता है क्या? स्पष्ट कीजिए।

1

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

‘गीत-अगीत’ के केंद्रीय भाव को लिखिए।

3

निम्नलिखित उदाहरण में वाक्य-विचलन को समझने का प्रयास कीजिए। इसी आधार पर प्रचिलित वाक्य-विन्यास लिखिए-

उदाहरणः तट पर एक गुलाब सोचता


एक गुलाब तट पर सोचता है।


क) देते स्वर यदि मुझे विधाता


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ख) बैठा शुक उस घनी डाल पर


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ग) गूँज रहा शुक का स्वर बन में


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घ) हुई न क्यों मैं कड़ी गीत की


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ङ) शुकी बैठ अंडे है सेती


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