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इस कविता का मूलभाव क्या है? स्पष्ट कीजिए।

इस कविता का मूलभाव इंसान के संघर्षमयी जीवन पर आधारित है, जिसे कवि ने अग्नि पथ का नाम दिया है। इस कविता के माध्यम से कवि कहना चाहता है कि इंसान का जीवन तमाम मुश्किलों, कठिनाइयों से भरा हुआ है। उसके कदम-कदम पर चुनौतियों का पहाड़ है। जीवन की इस कठोर डगर पर चलने वाले इंसान को कभी मुश्किलों से घबराकर पीछे नहीं हटना चाहिए। इसमें कई बार मुश्किलें इंसान का रास्ता रोकेंगी। कई बार परेशानियां उसे डराकर थम जाने या मुड़ जाने के लिए विवश करेंगी, लेकिन लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक मुश्किलों से लड़ने वाले को ही अंत में जीत हासिल होती है। आंसू, पसीना बहाते हुए खून से लथपथ इंसान को कांटों पर चलकर सफलता का रास्ता तय करना पड़ता है।


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