व्याख्या कीजिए-
• पीपल के पत्ते-से नए-नए हाथ
जूही की डाल-से खुशबुदार हाथ
• दुनिया की सारी गंदगी के बीच
दुनिया की सारी खुशबु
रचते रहते हैं हाथ
• कवि ने कहा है कि अगरबत्ती बनाने वालों के हाथ तरह-तरह के होते हैं। किसी के हाथों में उभरी हुई नसें होती हैं। किसी के हाथों के नाखून घिसे होते हैं। कुछ बच्चे भी ये काम करते हैं जिनके हाथ पीपल के नए पत्ते समान होते हैं। कुछ लड़कियां भी अगरबत्तियां बनाती हैं जिनके हाथ जूही की डाल के समान होते हैं। किसी के हाथ जख्म से फटे होते हैं। कुछ कारीगरों के हाथ गंदे होते हैं।
• अगरबत्तियां बनाने वाले दूसरों के घरों में खुशबू फैलाने का काम करते हैं। उनकी बनाई हुई अगरबत्तियां दूर-दूर तक जाती हैं। लेकिन उनका खुद का जीवन खुशबूदार नहीं हो पाता। अगरबत्तियां बनाने वाले अक्सर गंदे मोहल्ले, कूड़े के ढेर के बीच और बड़े शहरों की झोपड़पट्टियों में रहते हैं। इतनी गंदगी में रहते हुए वो पूरी दुनिया को महकाने का काम करते हैं।
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