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दोषों का पर्दाफाश करना कब बुरा रुप ले सकता है?

दोषों का पर्दाफाश करना तब बुरा रूप् ले सकता है जब उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति का केवल मजाक उड़ाना हो| इस पर्दाफाश के पीछे किसी के दोष को सुधारने का उद्देश्य न होकर उसकी बदनामी करना हो। इसके अलावा इस पर्दाफाश के पीछे किसी की भलाई का लक्ष्य न हो, किसी संस्था या प्रतिष्ठान को बदनाम करना हो, सत्यता को बिना जाने-समझे लोगों के सामने लाना, अपनी निजी वैमनस्यता का बदला लेने की भावना हो या स्वयं की अधिकाधिक महत्वाकांक्षा के तहत अपने चैनल आदि की प्रसिद्धि बढ़ानी हो। इस प्रकार की स्थितियों में किया गया दोषों का पर्दाफाश बुरा रूप ले सकता है|


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समाचार-पत्रें, पत्रिकाओं और टेलीविजन पर आपने ऐसी अनेक घटनाएँ देखी-सुनी होंगी जिनमें लोगों ने बिना किसी लालच के दूसरों की सहायता की हो या ईमानदारी से काम किया हो। ऐसे समाचार तथा लेख एकत्रित करें और कम-से-कम दो घटनाओं पर अपनी टिप्पणी लिखें।

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लेखक ने अपने जीवन की दो घटनाओं में रेलवे टिकट बाबू और बस कंडक्टर की अच्छाई और ईमानदारी की बात बताई है। आप भी अपने या अपने किसी परिचित के साथ हुई किसी घटना के बारे में बताइए जिसमें किसी ने बिना किसी स्वार्थ के भलाई और ईमानदारी के कार्य किए हों।

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आजकल के बहुत से समाचार पत्र या समाचार चैनल दोषों का पर्दाफाश कर रहे हैं। इस प्रकार के समाचारों और कार्यक्रमों की सार्थकता पर तर्क सहित विचार लिखिए।

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निम्नलिखित के संभावित परिणाम क्या-क्या हो सकते हैं? आपस में चर्चा कीजिए, जैसे

ईमानदारी को मूर्खता का पर्याय समझा जाने लगा है। परिणाम- भ्रष्टाचार बढ़ेगा।


1- फ्सच्चाई केवल भीरु और बेबस लोगों के हिस्से पड़ी है।-------------------------------


2- फ्झूठ और फरेब का रोजगार करनेवाले फल-प्फ़ूल रहे हैं।-------------------------------


3- हर आदमी दोषी अधिक दिख रहा है, गुणी कम-------------------------------