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आजकल के बहुत से समाचार पत्र या समाचार चैनल दोषों का पर्दाफाश कर रहे हैं। इस प्रकार के समाचारों और कार्यक्रमों की सार्थकता पर तर्क सहित विचार लिखिए।

आजकल बहुत से समाचार पत्र या समाचार चैनल दोषों का पर्दाफाश कर रहे हैं। इस तरह के कार्यक्रमों की सार्थकता तभी है, जब इनको पढ़कर या देखकर नागरिक जागरूक हो जाएँ। वे अपराधियों या दोषियों से बच सकें तथा अपने आसपास घटनाओं को दोबारा न घटने दें। इन कार्यक्रमों की सार्थकता तभी है जब पर्दाफाश करने वाले कार्यक्रमों के पीछे सच्चाई और ईमानदारी तथा जनकल्याण की भावना छिपी हो। यदि इनके पीछे स्वार्थ, धनोपार्जन या चैनलों की प्रसिद्धि बढ़ाने की लालसा छिपी हो तो इन कार्यक्रमों की कोई सार्थकता नहीं है।


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लेखक ने अपने जीवन की दो घटनाओं में रेलवे टिकट बाबू और बस कंडक्टर की अच्छाई और ईमानदारी की बात बताई है। आप भी अपने या अपने किसी परिचित के साथ हुई किसी घटना के बारे में बताइए जिसमें किसी ने बिना किसी स्वार्थ के भलाई और ईमानदारी के कार्य किए हों।

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दोषों का पर्दाफाश करना कब बुरा रुप ले सकता है?

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निम्नलिखित के संभावित परिणाम क्या-क्या हो सकते हैं? आपस में चर्चा कीजिए, जैसे

ईमानदारी को मूर्खता का पर्याय समझा जाने लगा है। परिणाम- भ्रष्टाचार बढ़ेगा।


1- फ्सच्चाई केवल भीरु और बेबस लोगों के हिस्से पड़ी है।-------------------------------


2- फ्झूठ और फरेब का रोजगार करनेवाले फल-प्फ़ूल रहे हैं।-------------------------------


3- हर आदमी दोषी अधिक दिख रहा है, गुणी कम-------------------------------


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आपने इस लेख में एक बस की यात्र के बारे में पढ़ा। इससे पहले भी आप एक बस-यात्र के बारे में पढ़ चुके हैं। यदि दोनों बस-यात्रओं के लेखक आपस में मिलते तो एक-दूसरे को कौन-कौन सी बातें बताते? अपनी कल्पना से उनकी बातचीत लिखिए।