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आदर्शों की बातें करना तो बहुत आसान है पर उन पर चलना बहुत कठिन है। क्या आप इस बात से सहमत हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

आदर्शों की बातें करना तो बहुत आसान है पर उन पर चलना बहुत ही मुश्किल है। मैं भी इस बात से पूरी तरह सहमत हूं। ईमानदारी की बातें करने वाले और उस पर ज्ञान देने वालों की कमी नहीं है। लेकिन जब वास्तव में ईमानदारी दिखाने का समय आता है तब लोग अपने स्वार्थ को प्राथमिकता देने लगते हैं। असल में ज्यादातर शक्तिशाली व्यक्ति प्रभुत्व हासिल करने के लिए कभी सच्चाई और ईमानदारी से काम नहीं करते। वहीं जो कमजोर हैं उनके पास ईमानदारी दिखाने के अलावा और कुछ नहीं। स्वार्थपर्ता और प्रभुत्व का लालच इंसान को हमेशा ईमानदारी के मार्ग से भटकाने का काम करता है।


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लेखक ने लेख का शीर्षक क्या निराश हुआ जाए क्यों रखा होगा? क्या आप इससे भी बेहतर शीर्षक सुझा सकते हैं?

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यदि क्या निराश हुआ जाए के बाद कोई विराम-चिह्न लगाने के लिए कहा जाए तो आप दिए चिह्नों में से कौन-सा चिह्न लगाएँगे? अपने चुनाव का कारण भी बताइए। -, !, !, ?, _, -, -----

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हमारे महान मनीषियों के सपनों का भारत है और रहेगा।य्

1- आपके विचार से हमारे महान विद्वानों ने किस तरह के भारत के सपने देखे थे? लिखिए।


2- आपके सपनों का भारत कैसा होना चाहिए? लिखिए।


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दो शब्दों के मिलने से समास बनता है। समास का एक प्रकार है- द्वंद्व समास। इसमें दोनों पद प्रधान होते हैं। जब दोनों पद प्रधान होंगे तो एक-दूसरे में द्वंद्व (स्पर्धा, होड़) की संभावना होती है। कोई किसी से पीछे रहना नहीं चाहता, जैसे- चरम और परम = चरम-परम, भीरु और बेबस = भीरु-बेबस, दिन और रात = दिन-रात।

और के साथ आए शब्दों के जोड़े को और हटाकर योजक चिह्न (-) भी लगाया जाता है। कभीकभी एक साथ भी लिखा जाता है। पाठ से द्वंद्व समास के बारह उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।