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पाठ से

पर्दे की आड़ में खड़े अन्य साथी मन-ही-मन राकेश की तुरतबुद्धि की प्रशंसा क्यों कर रहे थे?


पर्दे की आड़ में खड़े अन्य साथी मन-ही-मन राकेश की तुरतबुद्धि की प्रशंसा इसलिए कर रहे थे क्योकि जब नाटक बिगड़ गया था तो राकेश ने ही बात सँभाली। जब सारे दर्शक नाटक को खराब होता देख बिल्कुल शांत हो गए थे तो राकेश ने बिगड़ती स्थिति को संभाला जिससे दर्शकों को इस बात का जरा भी अंदेशा नहीं हुआ कि नाटक में किसी तरह की कोई गलती भी हुई है।


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बच्चों ने मंच की व्यवस्था किस प्रकार की?


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नाटक के लिए रिहर्सल की ज़रूरत क्यों होती है?


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नाटक की बात

जब नाटक में अभिनय करने वाले कलाकार भी नए हों, मंच पर आकर डर जाते हों, घबरा जाते हों और कुछ-कुछ बुद्धू भी हों, तब तो अधूरी तैयारी से खेलना नहीं चाहिए।


) ऊपर के वाक्य में नाटक से जुड़े कई शब्द आए हैं; जैसे-अभिनय ,कलाकार और मंच आदि। तुम पूरी कहानी को पढ़कर ऐसे ही और शब्दों की सूची बनाओ।


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शायर और शायरी

सोहन बना था शायर।


तुम किसी गज़ल को किसी पुस्तक में पढ़ सकते हो या किसी व्यक्ति द्वारा गाते हुए सुन सकते हो। इसमें से तुम्हें जो भी पसंद हो उस इकट्ठा करो। उसे तुम समुचित पर आवश्यकतानुसार गा भी सकते हो।