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फ़र्श पर कविता

“और इस तरह लिखती है हर रोज़ एक कविता फ़र्स पर।”


कविता में फ़र्श पर काम करने को भी कविता लिखना बताया गया है। फ़र्श के अतिरिक्त अन्यत्र भी तुम कुछ लोगों को काम करते हुए पा सकते हैं। उनमें से तुम जिन कामों को कविता लिखना बता सकते हो, बताओ और उसके कारण भी बताओ।


कामवाली जब बर्तन मांजती हैं, तो उस काम में भी कविता जैसी तरंग और लय होती है| जब वह बर्तन धोती है, तभी बर्तन घिस घिस कर और बर्तन गिराकर भी आवाजें आती हैं। इसी प्रकार बर्तन मांजने को भी कविता कहा जा सकता है।

इसी प्रकार कपड़े धोने को भी कविता कहा गया है। क्योंकि जब कपड़े धोते है तो कपड़े घिसने की आवाज आती है|


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2

तुम्हारी बात

तुम अपने घर को साफ रखने के लिए क्या-क्या करते हो? उन कामों की सूची बनाओ और उसके सामने यह भी लिखो कि तुम वह काम कब-कब करते हो।


3

तुम्हारी कल्पना

कविता में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं-


चिड़िया, डाल, तिनके, सूरज, हवा, हाथ, मुन्ना, कविता


इनका प्रयोग करते हुए कोई कहानी या कविता लिखो।


5

बच्चे और फ़र्श

बच्चे फ़र्श पर अपनी मर्ज़ी से जो उन्हें अच्छा काम लगता है वो काम करते हैं। उसमें कभी-कभी फ़र्श को तो कभी-कभी बच्चों को भी नुकसान उठाना पड़ता है। पता करो-


क) बच्चों द्वारा फ़र्श पर क्या-क्या करने से उन्हें नुकसान होता है? उसकी सूची बनाओ।


ख) बच्चों के किन-किन कामों से फ़र्श को नुकसान होता है?


6

काम के शब्द

कविता में बहुत से कामों का जिक्र किया गया है; जैसे-बीनना, बिखेरना, सजाना, उतारना, समेटना, आदि। इन्हें क्रियाओं कहते हैं। नीचे कुछ शब्द दिए गए हैं। इन्हें उचित क्रिया के साथ लिखो- पानी, टोकरी, बस्ता, चावल, हथेली, रंग, जूते


................ बीनना ................... बिखेरना .................सजाना


................ उतारना ...............समेटना