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कठपुतली को गुस्सा क्यों आया?

कठपुतली आगे-पीछे धागों से बंधी रहती है और अपने बंधनों को देखकर उसे गुस्सा जाता है। वह पराधीन रहकर जीवन बिता रही थी। उसे दूसरों के ईशारों पर नाचने से दुख होता था। वह स्वतंत्र होकर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी। इसी वजह से कठपुतली को गुस्सा जाता है।


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2

कठपुतली को अपने पाँवों पर खड़ी होने की इच्छा है, लेकिन वह क्यों नहीं खड़ी होती?

3

पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतलियों को क्यों अच्छी लगी।

4

पहली कठपुतली ने स्वयं कहा कि - ‘ये धागे/क्यों हैं मेरे पीछे-आगे? /इन्हें तोड़ दो; / मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो। तो फिर वह चिंतित क्यों हुई कि- ‘ये कैसी इच्छा/मेरे मन में जगी?’ नीचे दिए वाक्यों की सहायता से अपने विचार व्यक्त कीजिए-

उसे दूसरी कठपुतलियों की जिम्मेदारी महसूस होने लगी।


उसे शीघ्र स्वतंत्र होने की चिंता होने लगी।


वह स्वतंत्रता की इच्छा को साकार करने और स्वतंत्रता को हमेशा बनाए रखने के उपाय सोचने लगी।


वह डर गई, क्योंकि उसकी उम्र कम थी।


1

बहुत दिन हुए / हमें अपने मन के छंद छुए। इस पंक्ति का अर्थ और क्या हो सकता है? नीचे दिए हुए वाक्यों की सहायता से सोचिए और अर्थ लिखिए-

() बहुत दिन हो गए, मन में उमंग नहीं आई।


() बहुत दिन हो गए, मन के भीतर कविता-सी कोई बात नहीं उठी, जिसमें छंद हो, लय हो।


() बहुत दिन हो गए, गाने-गुनगुनाने का मन नहीं हुआ।


() बहुत दिन हो गए, मन का दुख दूर नहीं हुआ और मन में खुशी आई।