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बहुत दिन हुए / हमें अपने मन के छंद छुए। इस पंक्ति का अर्थ और क्या हो सकता है? नीचे दिए हुए वाक्यों की सहायता से सोचिए और अर्थ लिखिए-

() बहुत दिन हो गए, मन में उमंग नहीं आई।


() बहुत दिन हो गए, मन के भीतर कविता-सी कोई बात नहीं उठी, जिसमें छंद हो, लय हो।


() बहुत दिन हो गए, गाने-गुनगुनाने का मन नहीं हुआ।


() बहुत दिन हो गए, मन का दुख दूर नहीं हुआ और मन में खुशी आई।


बहुत दिन हो गए, मन का दुःख दूर नहीं हुआ और मन में खुशी आई|


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3

पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतलियों को क्यों अच्छी लगी।

4

पहली कठपुतली ने स्वयं कहा कि - ‘ये धागे/क्यों हैं मेरे पीछे-आगे? /इन्हें तोड़ दो; / मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो। तो फिर वह चिंतित क्यों हुई कि- ‘ये कैसी इच्छा/मेरे मन में जगी?’ नीचे दिए वाक्यों की सहायता से अपने विचार व्यक्त कीजिए-

उसे दूसरी कठपुतलियों की जिम्मेदारी महसूस होने लगी।


उसे शीघ्र स्वतंत्र होने की चिंता होने लगी।


वह स्वतंत्रता की इच्छा को साकार करने और स्वतंत्रता को हमेशा बनाए रखने के उपाय सोचने लगी।


वह डर गई, क्योंकि उसकी उम्र कम थी।


2

नीचे दो स्वतंत्रता आंदोलनों के वर्ष दिए गए हैं। इन दोनों आंदोलनों के दो-दो स्वतंत्रता सैनानियों के नाम लिखिए-

() सन् 1857


() सन् 1942


1

स्वतंत्र होन की लड़ाई कठपुतलियों ने कैसे लड़ी होगी और स्वतंत्र होने के बाद उन्होंने स्वावलंबी होने के लिए क्या-क्या प्रयत्न किए होंगे? यदि उन्हें फिर से धागे में बाँधकर नचाने के प्रयास हुए होंगे तब उन्होंने अपनी रक्षा किस तरह के उपायों से की होगी?