Q3 of 9 Page 20

पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतलियों को क्यों अच्छी लगी।

पहली कठपुतली की बात बाकी दूसरी कठपुतलियों को इसलिए अच्छी लगी क्योंकि अन्य कठपुतलियां भी इस बंधन से दुखी हो चुकी थीं और मुक्त होना चाहती थीं। वह भी दूसरों के इशारों पर नाँचकर थक चुकी थीं। स्वतंत्रता तो हर किसी को प्यारी होती है। जब पहली कठपुतली ने दुख से बाहर निकलने के लिए विद्रोह किया तो दूसरी कठपुतलियों को भी इससे साहस मिला।


More from this chapter

All 9 →
1

कठपुतली को गुस्सा क्यों आया?

2

कठपुतली को अपने पाँवों पर खड़ी होने की इच्छा है, लेकिन वह क्यों नहीं खड़ी होती?

4

पहली कठपुतली ने स्वयं कहा कि - ‘ये धागे/क्यों हैं मेरे पीछे-आगे? /इन्हें तोड़ दो; / मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो। तो फिर वह चिंतित क्यों हुई कि- ‘ये कैसी इच्छा/मेरे मन में जगी?’ नीचे दिए वाक्यों की सहायता से अपने विचार व्यक्त कीजिए-

उसे दूसरी कठपुतलियों की जिम्मेदारी महसूस होने लगी।


उसे शीघ्र स्वतंत्र होने की चिंता होने लगी।


वह स्वतंत्रता की इच्छा को साकार करने और स्वतंत्रता को हमेशा बनाए रखने के उपाय सोचने लगी।


वह डर गई, क्योंकि उसकी उम्र कम थी।


1

बहुत दिन हुए / हमें अपने मन के छंद छुए। इस पंक्ति का अर्थ और क्या हो सकता है? नीचे दिए हुए वाक्यों की सहायता से सोचिए और अर्थ लिखिए-

() बहुत दिन हो गए, मन में उमंग नहीं आई।


() बहुत दिन हो गए, मन के भीतर कविता-सी कोई बात नहीं उठी, जिसमें छंद हो, लय हो।


() बहुत दिन हो गए, गाने-गुनगुनाने का मन नहीं हुआ।


() बहुत दिन हो गए, मन का दुख दूर नहीं हुआ और मन में खुशी आई।