Q3 of 20 Page 30

आपको क्या लगता है- वक्त के साथ फेरी के स्वर कम हुए हैं? कारण लिखिए।

फेरी का जमाना पहले था, जो अब खत्म होता जा रहा है। गांवों में फेरीवाले अभी भी आते हैं लेकिन शहरों में अब ये बिल्कुल नजर नहीं आते हैं। अब लोगों के रहन सहन का स्तर बढ़ गया है इसलिए इन फेरीवालों से कोई सामान नहीं लेता है। ऐसे में फेरीवालों ने अपनी दुकानें खोल ली हैं। जगह जगह मॉल और शॉपिंग सेंटर खुलने से फेरीवालों का महत्व खत्म हो गया है। शहर के लोग फेरीवालों के सामान की क्वालिटी को अच्छा नहीं मानते हैं। फेरीवालों का सामान सस्ता होता है जब मॉल में वही सामान की कीमत तिगुनी हो जाती है। इसके अलावा सामान खरीदने के बहाने ही लोग घरों से बाहर जाकर घूम-फिर आते हैं।


More from this chapter

All 20 →
1

आपकी गलियों में कई अजनबी फेरीवाले आते होंगे। आप उनके बारे में क्या-क्या जानते हैं? अगली बार जब आपकी गली में कोई फेरीवाला आए तो उससे बातचीत कर जानने की कोशिश कीजिए।

2

आपके माता-पिता के जमाने से लेकर अब तक फेरीवाले की आवाजों में कैसा बदलाव आया हैं? बड़ो से पूछकर लिखिए।

1

मिठाईवाला, बोलने वाली गुडि़या

ऊपर ‘वाला’ का प्रयोग है। अब बताइए कि-


(क) ‘वाला’ से पहले आनेवाले शब्द संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि में से क्या हैं?


(ख) ऊपर लिखे वाक्यांशों में उनका क्या प्रयोग है?


2

अच्छा मुझे ज्यादा वक्त नहीं, जल्दी से दो ठो निकाल दो।’

उपर्युक्त वाक्य में ‘ठो’ के प्रयोग की ओर ध्यान दीजिए। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार की भाषाओं में इस शब्द का प्रयोग संख्यावाची शब्द के साथ होता है, जैसे- भोजपुरी में एक ठो लड़का, चार ठे आलू, तीन ठे बटुली।


ऐसे शब्दों का प्रयोग भारत की कई अन्य भाषाओं/बोलियों में भी होता है। कक्षा में पता कीजिए कि किस किस की भाषा बोली में ऐसा है। इस पर सामूहिक बातचीत कीजिए।