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इस कहानी को पढ़कर क्या आपको यह अनुभूति हुई कि दूसरों को प्यार और खुशी देने से अपने मन का दुःख कम हो जाता है? समूह में बातचीत कीजिए।

कहते हैं कि सुख बांटने से सुख और दुख बांटने से दुख बढ़ता है। रोहिणी ने मिठाईवाले से उसकी जीवन कहानी जाननी चाही। इस पर मिठाईवाले ने रोहिणी और दादी को अपने बारे में सबकुछ बता दिया। जबकि रोहिणी और दादी मिठाईवाले के लिए बिल्कुल अंजान थी। जब उसे रोहिणी और दादी से प्यार और हमदर्दी मिली तो वो भी खुद को नहीं रोक पाया। ये सारी बातें बताकर उसके मन का दुख थोड़ा कम हो गया। इसी वजह से उसने मिठाई के पैसे लेने से भी मना कर दिया। हमें भी हमेशा अपने आस पास के लोगों से प्यार से बात करनी चाहिए।


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2

अच्छा मुझे ज्यादा वक्त नहीं, जल्दी से दो ठो निकाल दो।’

उपर्युक्त वाक्य में ‘ठो’ के प्रयोग की ओर ध्यान दीजिए। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार की भाषाओं में इस शब्द का प्रयोग संख्यावाची शब्द के साथ होता है, जैसे- भोजपुरी में एक ठो लड़का, चार ठे आलू, तीन ठे बटुली।


ऐसे शब्दों का प्रयोग भारत की कई अन्य भाषाओं/बोलियों में भी होता है। कक्षा में पता कीजिए कि किस किस की भाषा बोली में ऐसा है। इस पर सामूहिक बातचीत कीजिए।


3

वे भी जान पड़ता है, पार्क में खेलने निकल गए हैं।’

क्यों भई, किस तरह देते हो मुरली?’


दादी, चुन्नू-मुन्नू के लिए मिठाई लेनी है? जरा कमरे में चलकर ठहराओ।’


भाषा के ये प्रयोग आजकल पढ़ने-सुनने में नहीं आते। आप ये बातें कैसे कहेंगे?’


1

फेरीवालों की दिनचर्या कैसी होती होगी? उनका घर-परिवार कहाँ होगा? उनकी जिंदगी में किस प्रकार की समस्याएँ और उतार-चढ़ाव आते होंगे? यह जानने के लिए तीन-तीन के समूह में छात्र-छात्रएँ कुछ प्रश्न तैयार करें और फेरीवालों से बातचीत करें। प्रत्येक समूह अलग-अलग व्यवसाय से जुड़े फेरीवालों से बात करें।

3

अपनी कल्पना की मदद से मिठाईवाले का चित्र शब्दों के माध्यम से बनाइए।