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अच्छा मुझे ज्यादा वक्त नहीं, जल्दी से दो ठो निकाल दो।’

उपर्युक्त वाक्य में ‘ठो’ के प्रयोग की ओर ध्यान दीजिए। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार की भाषाओं में इस शब्द का प्रयोग संख्यावाची शब्द के साथ होता है, जैसे- भोजपुरी में एक ठो लड़का, चार ठे आलू, तीन ठे बटुली।


ऐसे शब्दों का प्रयोग भारत की कई अन्य भाषाओं/बोलियों में भी होता है। कक्षा में पता कीजिए कि किस किस की भाषा बोली में ऐसा है। इस पर सामूहिक बातचीत कीजिए।


बिहार के मिथिला क्षेत्र में जहाँ मैथिली बोली जाती हैं, वहाँ पर ‘ठो’, ‘ठे’ के स्थान पर ‘टा’ का प्रयोग करते हैं। जैसे-

एक ठो कलम - एक टा कलम


पाँच ठो कापी- पाँच टा कापी


इसके अलावा उत्तर प्रदेश के बनारस में भी ऐसी भाषा बोली जाती है। साथ ही इलाहाबाद और पूर्वांचल क्षेत्रों में ठो लगाकर भाषा का प्रयोग किया जाता है।


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आपको क्या लगता है- वक्त के साथ फेरी के स्वर कम हुए हैं? कारण लिखिए।

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मिठाईवाला, बोलने वाली गुडि़या

ऊपर ‘वाला’ का प्रयोग है। अब बताइए कि-


(क) ‘वाला’ से पहले आनेवाले शब्द संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि में से क्या हैं?


(ख) ऊपर लिखे वाक्यांशों में उनका क्या प्रयोग है?


3

वे भी जान पड़ता है, पार्क में खेलने निकल गए हैं।’

क्यों भई, किस तरह देते हो मुरली?’


दादी, चुन्नू-मुन्नू के लिए मिठाई लेनी है? जरा कमरे में चलकर ठहराओ।’


भाषा के ये प्रयोग आजकल पढ़ने-सुनने में नहीं आते। आप ये बातें कैसे कहेंगे?’


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फेरीवालों की दिनचर्या कैसी होती होगी? उनका घर-परिवार कहाँ होगा? उनकी जिंदगी में किस प्रकार की समस्याएँ और उतार-चढ़ाव आते होंगे? यह जानने के लिए तीन-तीन के समूह में छात्र-छात्रएँ कुछ प्रश्न तैयार करें और फेरीवालों से बातचीत करें। प्रत्येक समूह अलग-अलग व्यवसाय से जुड़े फेरीवालों से बात करें।