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एन.सी.आर.टी. की श्रव्य श्रृंखला ‘पिता के पत्र पुत्री के नाम’।

जवाहर लाल नेहरू अपनी बेटी इंदिरा गांधी को खत लिखा करते थे। यह वक्त सन 1928 का था। उस वक्त इंदिरा मसूरी में थीं और जवाहर लाल नेहरू इलाहाबाद में। इस दौरान उन्होंने इंदिरा गांधी को करीब 31 पत्र लिखे। इन पत्रों में नेहरू जी ने इंदिरा के सवालों का जवाब देने की कोशिश की। इन पत्रों को लेकर लोग पुस्काएं छापना चाहते थे। नेहरू और इंदिरा का ये पत्राचार चर्चा का विषय बन गया था। नेहरू जी को समझ नहीं आ रहा था कि पत्रों को पुस्तिका में छपवाएं या नहीं तब उन्होंने गांधी जी से राय ली। गांधी जी ने इन पत्रों को पढ़ा और पुस्तिका में छपने को कहा। गांधी ने जी ने कहा पत्र बहुत अच्छे हैं। तुमने हिंदी में लिखा होता तो ज्यादा अच्छा रहता। इस बात का ध्यान रखना कि इसका हिंदी में भी प्रकाशन हो।


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जब तुम मेरे साथ रहती हो, तो अक्सर मुझसे बहुत-सी बातें पूछा करती हो।’

यह वाक्य दो वाक्यों को मिलाकर बना है। इन दोनों वाक्यों को जोड़ने का काम ‘जब ----तो (तब)’ कर रहे हैं, इसलिए इन्हें योजक कहते हैं। योजक के रूप में कभी कोई बदलाव नहीं आता, इसलिए ये अव्यय का एक प्रकार होते हैं। नीचे वाक्यों को जोड़ने वाले कुछ और अव्यय दिए गए हैं। उन्हें रिक्त स्थानों में लिखो। इन शब्दों से तुम भी एक एक वाक्य बनाओ।


(क) कृष्णन फिल्म देखना चाहता है -------------------- मैं मेले में जाना चाहती हूं।


(ख) मुनिया ने सपना देखा ---------------- वह चंद्रमा पर बैठी है।


(ग) छुट्टियों में हम सब ----------- दुर्गापुर जाएँगे --------------- जालंधर।


(घ) सब्जी कटवाकर रखना --------------- घर आते ही मैं खाना बना लूँ।


(घ) --------------मुझे पता होता कि शमीना बुरा जाएगी ------------ मैं यह बात न कहती।


(च) इस वर्ष फसल अच्छी नहीं हुई है ----------------- अनाज महँगा है।


(छ) विमल जर्मन सीख रहा है ------------- फ्रेंच।


बल्कि / इसलिए / परंतु / कि / यदि / तो / न कि / या / ताकि


1

पास के शहर में कोई संग्रहालय हो तो वहां जाकर पुरानी चीजें देखो। अपनी कक्षा में उस पर चर्चा करो।

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एन.सी.आर.टी. का श्रव्य कार्यक्रम ‘पत्थर और पानी की कहानी’।

3

पिता के पत्र पुत्री के नाम’ पुस्तक पुस्तकालय से लेकर पढ़ो।