न्यूटन को संस्कृत मानव कहने के पीछे कौन से तर्क दिए गए हैं? न्यूटन द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों एवं ज्ञान की कई दूसरी बारीकियों को जानने वाले लोग भी न्यूटन की तरह संस्कृत नहीं कहला सकते, क्यों?
लेखक के अनुसार संस्कृत व्यक्ति वह है जो अपनी बुद्धि एवं कौशल के बल पर नयी खोज को अंजाम दे सके, नए तथ्यों को खोज सकें, विज्ञान के रहस्यों को सुलझा सके| लेखक के अनुसार न्यूटन एक संस्कृत व्यक्ति थे क्योंकि उन्होंने अपनी बुद्धि के कौशल से भौतिकी के मूल सिद्धांत जिसे गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत कहते हैं को स्थापित किया| आज गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत से अनेक लोग परिचित हैं और उनके पास भी न्यूटन जितनी जानकारी है लेकिन ऐसे व्यक्ति लेखक के अनुसार संस्कृत व्यक्तियों की श्रेणी में नहीं आते क्योंकि संस्कृत व्यक्ति वह होता है जो अपनी बुद्धि के बल पर नए सिद्धांतों को स्थापित करता है, नए तथ्यों की खोज करता है| सिर्फ जानकारी प्राप्त कर लेने से कोई व्यक्ति संस्कृत व्यक्ति नहीं हो जाता, जानकारी होने के साथ-साथ उसके पास दुनिया को एक अलग नजर से देखने का कौशल भी होना चाहिए|
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