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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए-

गिरगिट’ कहानी में आपने समाज में व्याप्त अवसरानुसार अपने व्यवहार को पल-पल में बदल डालने की एक बानगी देखी। इस पाठ के अंश ‘गिन्नी का सोना’ के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि ‘आदर्शवादिता’ और ‘व्यावहारिकता’ इनमें से जीवन में किसका महत्व है?

जीवन में आदर्शवादिता और व्यावहारिकता दोनों का महत्व है। ‘व्यावहारिकता’ हमें अवसरवादिता का पाठ पढ़ाती है। अवसरवादी व्यक्ति सदा अपना हित देखता है। वह प्रत्येक कार्य अपना लाभ-हानि देखकर ही करता है। व्यावहारिक लोग अपने स्वार्थ के लिए किसी से भी समझौता कर लेते हैं। लेकिन प्रैक्टिकल आइडियलिस्ट की तरह हमें व्यावहारिकता में आदर्शवादिता मिलाने से बचना चाहिए। इसकी जगह हमें गांधीजी की तरह व्यावहारिकता में आदर्शवादिता मिलाने की सीख लेनी चाहिए।


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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए-

अपने जीवन की किसी घटना का उल्लेख कीजिए जब-


(1) शुद्ध आदर्श से आपको हानि-लाभ हुआ हो।


(2) शुद्ध आदर्श में व्यावहारिकता का पुट देने से लाभ हुआ हो।

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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए-

‘शुद्ध सोने में ताँबे की मिलावट या ताँबे में सोना’, गाँधी जी के आदर्श और व्यवहार में यह बात किस तरह झलकती है? स्पष्ट कीजिए।

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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए-

लेखक के मित्र ने मानसिक रोग के क्या-क्या कारण बताए? आप इन कारणों से कहाँ तक सहमत हैं?

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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए-

लेखक के अनुसार सत्य केवल वर्तमान है, उसी में जीना चाहिए। लेखक ने ऐसा क्यों कहा होगा? स्पष्ट कीजिए।