निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए-
समाज के पास अगर शाश्वत मूल्यों जैसा कुछ है तो वह आदर्शवादी लोगों का ही दिया हुआ है।
आदर्श एवं मूल्यों का परस्पर घनिष्ठ संबंध होता है। आदर्श के बिना मूल्य और मूल्यों के बिना आदर्श की कल्पना करना संभव नहीं है। आदर्शवादी लोग कभी भी अपने बारे में नहीं सोचते हैं। वे हमेशा दूसरों को ऊपर उठाने की कोशिश करते हैं। इस प्रक्रिया में उनका कद भी ऊँचा हो जाता है और पूरे समाज को दीर्घकालीन लाभ होता है। व्यावहारिक लोग तो केवल अपने मतलब की बात करते हैं, जिससे समाज का कोई भला नहीं होता। इसलिए ऐसा कहा जा सकता है कि समाज के पास अगर शाश्वत मूल्यों जैसा कुछ है तो वह आदर्शवादी लोगों का ही दिया हुआ ही है।
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