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इफ्फ़न की दादी के देहांत के बाद टोपी को उसका घर खाली सा क्यो लगा?

इफ़्फ़न की दादी स्नेहमयी थीं। वह टोपी को बहुत प्यार दुलार करती थीं। टोपी को भी स्नेह व अपनत्व की जरूरत थी क्योंकि यही प्रेम उसे अपनी दादी से नहीं मिल पाता था। इफ्फ़न की दादी टोपी को कई बार खाने की चींज देना चाहती थी, किंतु वह दादी के हजार कहने के बाद भी कुछ न लेता। टोपी जब भी इफ्फन के घर जाता था, वह अधिकतर उसकी दादी के पास बैठने की कोशिश करता था क्योंकि उस घर में वही उसे सबसे अच्छी लगती थीं। वे दोनों अपने घरों मे अकेलापन महसूस करते थे। एक-दूसरे के प्रति लगाव ने दोनों का अकेलापन मिटा दिया था। दादी के देहांत के बाद टोपी के लिए वहाँ कोई न था। टोपी को वह घर खाली लगने लगा क्योंकि इफ्फ़न के घर का केवल एक आकर्षण था जो टोपी के लिए खत्म हो चुका था। इसी कारण टोपी को इफ्फन की दादी के देहांत के बाद उसका घर खाली-खाली-सा लगने लगा।


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