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कवियत्री द्वारा मुक्ति के लिए किए जाने वाले प्रयास व्यर्थ क्यों हो रहे हैं?

कवयित्री इस संसार में आकर संसारिकता अर्थात् लोभ, मोह,माया आदि में उलझ गयी और वह इस संसारिकता से मुक्त नहीं हो पाई। वह कोरी प्रभु भक्ति के सहारे भवसागर पार करना चाहती है। उसकी सांसों की डोर जो इस शारीर-रूपी नाव को खींच रही है, अत्यंत कमजोर है, इसलिए उसके द्वारा मुक्ति के लिए जा रहे सभी प्रयास विफल होते जा रहे हैं|


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