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ज्ञानी’ से कवियत्री का क्या अभिप्राय है?

ज्ञानी से कवियत्री का अभिप्राय एक ऐसे व्यक्ति से है जो हिंदू-मुसलमान दोनों में कोई अंतर न करे सरल भाषा में कहें तो ऐसा व्यक्ति जो धार्मिक आधार पर इंसानों में भेदभाव न करता हो क्योंकि देानेां ही उसी एक प्रभु की रचना है| साथ ही वह व्यक्ति अपने आप को पहचानने या आत्म-ज्ञान रखनेवाला भी हो। आत्म-ज्ञान को पहचानने वाला मनुष्य ही ज्ञानी होता है क्योंकि वह अपने आपको ठीक से समझ पाता है और उसमें आत्म संयम भी होता है| कवियत्री ने ऐसे व्यक्ति को ही आत्म ज्ञानी कहा है|


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भाव स्पष्ट कीजिए-

(क) जेब टटोली कौड़ी न पाई।


(ख) खा-खाकर कुछ पाएगा नहीं, न खाकर बनेगा अहंकारी।

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बंद-द्वार की सांकल खोलने के लिए लल्दय ने क्या उपाय सुझाया है?

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ईश्वर प्राप्ति के लिए बहुत से साधक हठयोग जैसी कठिन साधना भी करते हैं, लेकिन उससे भी लक्ष्य प्राप्ति नहीं होती। यह भाव किन पंक्तियों में व्यक्त हुआ है-

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हमारे संतों, भक्तों और महापुरुषों ने बार-बार चेताया है कि मनुष्यों में परस्पर किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं होता, लेकिन आज भी हमारे समाज में भेदभाव दिखाई देता है-

(क) आपकी दृष्टि में इस कारण देश और समाज को क्या हानि हो रही है?


(ख) आपसी भेदभाव को मिटाने के लिए अपने सुझाव दीजिए।