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चौथे सवैये के अनुसार गोपियाँ अपने आप को क्यों विवश पाती हैं?

गोपियाँ श्री कृष्ण भगवान से अत्यंत प्रेम करती है और उनको रिझाने का भी प्रयास करती है। लेकिन सभी गोपियाँ ये भी चाहती हैं कि श्री कृष्ण भगवान को ये बात पता नहीं चले। इसलिए वे सब योजना बनाती है की जब श्री कृष्ण भगवान अपनी बांसुरी बजायेंगे तो वे सब अपने कानो में उंगलियां रख लेंगी जिससे उन्हें बांसुरी की मधुर ध्वनि न सुनाई दे पाए। लेकिन वह सब विवश है कि जब बांसुरी की मधुर ध्वनि उनको सुनाई देगी तो उनके मुख की मुस्कान संभाले नहीं सम्भलेगी और श्री कृष्ण जी को यह पता चल जाएगा की वे सब उनसे अत्यंत प्रेम करती हैं। श्री कृष्ण जी की मुरली की मधुर ध्वनि सुनकर सभी गोपियाँ इतनी मग्न हो जाती है कि उनको कोई सुध-बुध नहीं रहती है और वे सब पूरी तरह से श्री कृष्ण के वश में हो जाती है। श्री कृष्ण जी की मुरली की मधुर ध्वनि से सारे ब्रजवासी मग्न-मुग्ध हो जाते थे और हर्ष, उल्लास से भर जाते थे और पशु, पक्षी भी उनके बांसुरी की धुन में लीन हो जाते थे।


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