‘प्रभात कि प्रथम किरण के स्पर्ष के साथ ही वह किसी और जीवन में जागने के लिए सो गया’-का आशय स्पष्ट कीजिए।
लेखिका द्वारा रचित प्रस्तुत पंक्ति में हमें उनके छायावादी या कहें कुछ-कुछ दार्शनिक सोच का पता चलता है। यहां उनके द्वारा भी पुनर्जन्म संबंधी दर्शन को रचना में देख सकते हैं कि कैसे जीव की मृत्यु हो जाने के पश्चात केवल उसका शरीर नष्ट होता है। उसकी आत्मा नष्ट नहीं होती है।उसकी आत्मा किसी और की देह में अपना स्थान प्राप्त कर हमारे सामने नये रूप में आती है। लेखिका की इस प्रकार की छायावादी सोच उनके अपने प्रिय गिलहरी गिल्लू की मृत्यु हो जाने पर इस पंक्ति में हम पाते हैं।
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