‘पानी की कहानी’ पाठ में ओस की बूँद अपनी कहानी स्वयं सुना रही है और लेखक केवल श्रोता है। इस आत्मकथात्मक शैली में आप भी किसी वस्तु का चुनाव करके कहानी लिखें।
आत्मकथात्मक शैली में कैरम बोर्ड की कहानी- मैं बचपन मे कैरमबोर्ड खेलना पसंद करता था। अधिकांश कैरमबोर्ड की तरह इसके चारों खाने तिकोने ना होकर गोल होने से इसपर खेलना थोङा कठिन जरुर था पर इस कारण से खेलने का मजा और अधिक हो जाता था। एक शाम हमलोग कैरम खेलकर उसे छत पर ही छोङकर घर में सो गये। अगली सुबह मैंने उसे परिवर्तित रूप में पाया। पूरा बोर्ड फूलकर कुप्पा हो चुका था। मेरे छूते ही वह बिफर पङा और कहने लगा- मैंने तुम्हारा साथ दिया और तुमने मेरा यह हाल किया। वह कहता गया- ना जाने कहां से प्लाई लाकर मेरे ऊपर डाला गया था जिससे कि तुम्हें कोई परेशानी ना हो। मेरे निर्माता ने तुम्हारे खेलने हेतु मेरी स्वाभाविक कठोरता जो मुझमें तुम्हें बोर्ड के चारों दीवारों और घेरों पर देखने को मिलती थी वही मेरी वास्तविक पहचान थी। सिर्फ तुम्हारे लिए मैंने अपने ऊपर प्लाई के कोमल आवरण को चढने दिया और हाय रे किस्मत तुमने उसपर वर्षा की बूंदें पङ जाने दिया और सारा खेल बिगाड़ दिया? मैं बङी देरतक बोर्ड के खराब हो जाने के बारे में सोचता रहा।
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