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अन्य पदार्थों के समान जल की भी तीन अवस्थाएँ होती हैं। इन्य पदार्थों से जल की इन अवस्थाओं में एक विशेष अंतर यह होता है जल की तरल अवस्था की तुलना में ठोस वर्फ हल्की होती है। इसका कारण ज्ञात कीजिए।

जल से वर्फ हल्की होती है। यह निर्विवाद सत्य है। वैज्ञानिक कारण से ऐसा होता है। प्रस्तुत तथ्य के अन्तर्गत वैज्ञानिक कारण यह है कि वर्फ ठोस अवस्था में होने के कारण इसका घनत्व जल के घनत्व की अपेक्षा कम होता है। इसे उदाहरण के रूप में इस प्रकार समझा जा सकता है कि एक लीटर के आयतन में जितना जल समायेगा उसी आयतन में जल की अधिक मात्रा आयेगी। समान आयतन या मिलाजुलाकर कर कहें उस क्षेत्र में वर्फ की कम मात्रा आ पाने के कारण ही यह पानी से हल्की होती है।


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पेड़ के भीतर फव्वारा नहीं होता, तब पेड़ की जड़ों से पत्ते तक पानी कैसे पहँुचता है? इस क्रिया को वनस्पति-शास्त्र में क्या कहते हैं? क्या इस क्रिया को जानने के लिए कोई आसान प्रयोग है? जानकारी प्राप्त कीजिए।

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पानी की कहानी’ में लेखक ने कल्पना और वैज्ञानिक तथ्य का आधार लेकर ओस की बूँद की यात्रा का वर्णन किया है। ओस की बूँद अनेक अवस्थाओं में सूर्यमंडल, पृथ्वी, वायु, समुद्र, ज्वालामुखी, बादल, नदी और जल से होते हुए पेड़ के पत्ते तक की यात्रा करती हैं। इस कहानी की भाँति आप भी लोहे अथवा प्लास्टिक की कहानी लिखने का प्रयास कीजिए।

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पाठ के साथ केवल पढ़ने के लिए दी गई पठन-सामग्री ‘हम पृथ्वी की संतान!’ का सहयोग लेकर पर्यावरण संकट पर एक लेख लिखें।

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किसी भी क्रिया को संपन्न अथवा पूरा करने में जो भी संज्ञा आदि शब्द संलग्न होते हैं, वे अपनी अलग-अलग भूमिकाओं के अनुसार अलग-अलग कारकों के रूप में वाक्य में दिखाई पड़ते हैं; जैसे- “वह हाथों से शिकार को जकड़ लेती थी|’’ जकड़ना क्रिया तभी संपन्न हो पाएगी जब कोई व्यक्ति (वह) जकड़नेवाला हो, कोई वस्तु (शिकार) हो, जिसे जकड़ा जाए। इन भूमिकाओं की प्रकृति अलग-अलग है। व्याकरण में ये भूमिकाएँ कारकों के अलग-अलग भेदों, जैसे- कर्ता, कर्म, करण आदि से स्पष्ट होती हैं।

अपनी पाठ्यपुस्तक से इस प्रकार के पाँच और उदाहरण खोजकर लिखिए और उन्हें भली-भाँति परिभाषित कीजिए।