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पाठ से

अंग्रेजों से लड़ने के लिए कोया आदिवासी क्या-क्या करते थे?


श्रीराम राजू के समझाने पर कोया आदिवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया। भद्राचलम से परवथीपुरम तक पूरे इलाके आदिवासी अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए कूद पड़े। जब संकरी पगडंडियों से सेना की टुकड़ी गुजर रही होती तो जंगलों में छिपे आदिवासी अंग्रेज सारजेंट और कमांडर पर अचूक निशाना लगाते। राजू ने एक कोने से दूसरे कोने तक गुप्त संदेश पहुंचाने के लिए जाल बिछा रखा था। जंगलों में आदिवासी बड़ी तेजी से छिपते फिरते। गांव के लोग भी उनका सहयोग करते और उन्हें छिपने के लिए जगह देते। वे अंग्रेजों को मारकर उनके हथियार छीन लेते थे।


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पाठ से

आंध्र के घने जंगलों में रहने वाले आदिवासियों के बीच अपना हक जमाने के लिए अंग्रेजों ने क्या किया?


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पाठ से

श्री राम राजू कौन था? उसने अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण क्यों किया?


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पाठ से

कोया आदिवासियों के विद्रोह को स्वतंत्रता संग्राम क्यों कहना चाहिए?


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गाँधी जी की बात

“भारत के लोगों को अंग्रेज सरकार का सहयोग नहीं करना चाहिए और उनका काम बंद कर देना चाहिए। अगर कोई अंग्रेज़ अन्याय करेगा तो हम अन्याय सहने से इंकार करेंगे।


उपर श्रीराम राजू द्वारा आदिवासियों से गाँधी जी की कही हुई बात का उल्लेख हुआ है। गाँधी जी ने स्वतंत्रता संग्राम के लिए बहुत सारी बातें कही थी। यह सब तुम्हें गाँधी जी पर लिखी गई किताबों, फ़िल्मों और अन्य जगहों पर मिल सकता है। तुम उनकी कही हुई बातों में जो बहुत महत्वपूर्ण समझो उसको अपने साथियों को बताओ।