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पाठ से

कोया आदिवासियों के विद्रोह को स्वतंत्रता संग्राम क्यों कहना चाहिए?


कोया आदिवासी थोड़े और कमजोर थे। जब श्रीराम राजू ने उनमें हिम्मत भरी तो उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया। आदिवासी ऐसी रणनीति बनाते थे कि अंग्रेज दांतों तले अंगुली दबा लेते थे। आदिवासियों को आता देख अंग्रेज पुलिस स्टेशन छोड़कर भाग जाते थे। अंग्रेजों में आदिवासियों का भय हो गया था। वो समझ गए थे कि आदिवासियों को हिलाना आसान नहीं है। कोय आदिवासी उन शुरूआती लोगों में से एक हैं जिन्होंने अंग्रेजों के द्वारा किये जा रहे जो जुल्म के खिलाफ आजादी की लड़ाई एवं क्रान्ति की शुरुआत की| इस वजह से आदिवायों के विद्रोह को स्वतंत्रता संग्राम कहना बिल्कुल ठीक है।


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पाठ से

श्री राम राजू कौन था? उसने अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण क्यों किया?


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पाठ से

अंग्रेजों से लड़ने के लिए कोया आदिवासी क्या-क्या करते थे?


2

गाँधी जी की बात

“भारत के लोगों को अंग्रेज सरकार का सहयोग नहीं करना चाहिए और उनका काम बंद कर देना चाहिए। अगर कोई अंग्रेज़ अन्याय करेगा तो हम अन्याय सहने से इंकार करेंगे।


उपर श्रीराम राजू द्वारा आदिवासियों से गाँधी जी की कही हुई बात का उल्लेख हुआ है। गाँधी जी ने स्वतंत्रता संग्राम के लिए बहुत सारी बातें कही थी। यह सब तुम्हें गाँधी जी पर लिखी गई किताबों, फ़िल्मों और अन्य जगहों पर मिल सकता है। तुम उनकी कही हुई बातों में जो बहुत महत्वपूर्ण समझो उसको अपने साथियों को बताओ।


3

देशभक्तों के नाम

तुमने इस पाठ में भारत की आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाले दो व्यक्तियों के नामों को जाना। एक गाँधी जी और दूसरा श्रीराम राजू। पता करो कि भारत की आज़ादी के लिए संघर्ष करने वालों में तुम्हारे प्रदेश से कौन-कौन व्यक्ति थे। उनमें से किसी एक के बारे में कक्षा में चर्चा करो।