शाम के बदले यदि आपको एक कविता सुबह के बारे में लिखनी हो तो किन किन चीजों की मदद लेकर अपनी कल्पना को व्यक्त करेंगे? नीचे दी गई कविता की पंक्तियों के आधार पर सोचिए-
पेड़ों के झुनझुने
बजने लगे;
सूरज की लाल गेंद।
उठ मेरी बेटी, सुबह हो गई।
- सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
यदि मुझे सुबह के बारे में कविता लिखनी हो तो निम्न चीजों की मदद लेकर अपनी कल्पना व्यक्त करूंगा- चिड़ियों की चह-चहाहट, ठंडी हवा से पेड़ों के पत्तों का हिलना और सर-सराहट की आवाज, फूलों का खिलना, आसमान से सूरज का उगना, तारों का गायब हो जाना, मंदिरों की घंटियों की आवाज और मंत्रों के उच्चारण।
Couldn't generate an explanation.
Generated by AI. May contain inaccuracies — always verify with your textbook.