Q1 of 9 Page 65

शाम के बदले यदि आपको एक कविता सुबह के बारे में लिखनी हो तो किन किन चीजों की मदद लेकर अपनी कल्पना को व्यक्त करेंगे? नीचे दी गई कविता की पंक्तियों के आधार पर सोचिए-

पेड़ों के झुनझुने


बजने लगे;


सूरज की लाल गेंद।


उठ मेरी बेटी, सुबह हो गई।


- सर्वेश्वरदयाल सक्सेना


यदि मुझे सुबह के बारे में कविता लिखनी हो तो निम्न चीजों की मदद लेकर अपनी कल्पना व्यक्त करूंगा- चिड़ियों की चह-चहाहट, ठंडी हवा से पेड़ों के पत्तों का हिलना और सर-सराहट की आवाज, फूलों का खिलना, आसमान से सूरज का उगना, तारों का गायब हो जाना, मंदिरों की घंटियों की आवाज और मंत्रों के उच्चारण।


More from this chapter

All 9 →
2

शाम के समय ये क्या करते हैं, पता लगाइए और लिखिए-

पक्षी, खिलाड़ी, फलवाले, माँ, पेड़-पैधे, पिता जी, किसान, बच्चे


3

हिंदी के एक प्रसिद्ध कवि सुमित्रानंदन पंत ने संध्या का वर्णन इस प्रकार किया है-

संध्या का झुटपुट


बांसों का झुरमुट


है चहक रहीं चिड़ियां


टी-वी-टी -- टुट्-टुट्


ऊपर दी गई कविता और सर्वेश्वरदयाल जी की कविता में आपको क्या मुख्य अंतर लगा? लिखिए।


1

नीचे लिखी पंक्तियों में रेखांकित शब्दों को ध्यान से देखिए-

(क) घुटनों पर पड़ी है नदी चादर-सी


(ख) सिमटा बैठा है भेड़ों के गल्ले-सा


(ग) पानी का परदा-सा मेरे आसपास था हिल रहा


(घ) मंडराता रहता था एक मरियल-सा कुत्ता आसपास


(घ) दिल है छोटा-सा छोटी-सी आशा


(च) घास पर फुदकती नन्हीं-सी चिड़िया


इन पंक्तियों में सा/सी का प्रयोग व्याकरण की दृष्टि से कैसे शब्दों के साथ हो रहा है?


2

निम्नलिखित शब्दों का प्रयोग आप किन संदर्भों में करेंगे? प्रत्येक शब्द के लिए दो-दो संदर्भ (वाक्य) रचिए।

आंधी, दहक, सिमटा