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नीचे लिखी पंक्तियों में रेखांकित शब्दों को ध्यान से देखिए-

(क) घुटनों पर पड़ी है नदी चादर-सी


(ख) सिमटा बैठा है भेड़ों के गल्ले-सा


(ग) पानी का परदा-सा मेरे आसपास था हिल रहा


(घ) मंडराता रहता था एक मरियल-सा कुत्ता आसपास


(घ) दिल है छोटा-सा छोटी-सी आशा


(च) घास पर फुदकती नन्हीं-सी चिड़िया


इन पंक्तियों में सा/सी का प्रयोग व्याकरण की दृष्टि से कैसे शब्दों के साथ हो रहा है?


सा/सी का प्रयोग व्याकरण की दृष्टि से दो प्रकार के शब्दों के साथ हो रहा है-

(1) किसी व्यक्ति, वस्तु अथवा किसी के नाम को संज्ञा कहते हैं। इस कविता में कई नामों का इस्तेमाल किया गया है। यह सभी नाम संज्ञा शब्द हैं जैसे- चादर-सी, गल्ले-सा तथा पर्दा-सा।


(2) वाक्य में संज्ञा या फिर सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द को विशेषण कहते हैं। इस कविता में कई ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है जो विशेषता बता रहे हैं। यह शब्द


मरियल-सा, छोटा-सा तथा नन्ही-सी हैं।


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2

शाम के समय ये क्या करते हैं, पता लगाइए और लिखिए-

पक्षी, खिलाड़ी, फलवाले, माँ, पेड़-पैधे, पिता जी, किसान, बच्चे


3

हिंदी के एक प्रसिद्ध कवि सुमित्रानंदन पंत ने संध्या का वर्णन इस प्रकार किया है-

संध्या का झुटपुट


बांसों का झुरमुट


है चहक रहीं चिड़ियां


टी-वी-टी -- टुट्-टुट्


ऊपर दी गई कविता और सर्वेश्वरदयाल जी की कविता में आपको क्या मुख्य अंतर लगा? लिखिए।


1

शाम के बदले यदि आपको एक कविता सुबह के बारे में लिखनी हो तो किन किन चीजों की मदद लेकर अपनी कल्पना को व्यक्त करेंगे? नीचे दी गई कविता की पंक्तियों के आधार पर सोचिए-

पेड़ों के झुनझुने


बजने लगे;


सूरज की लाल गेंद।


उठ मेरी बेटी, सुबह हो गई।


- सर्वेश्वरदयाल सक्सेना


2

निम्नलिखित शब्दों का प्रयोग आप किन संदर्भों में करेंगे? प्रत्येक शब्द के लिए दो-दो संदर्भ (वाक्य) रचिए।

आंधी, दहक, सिमटा