‘एक तिनका’ कविता में घमंडी को उसकी ‘समझ’ ने चेतावनी दी-
ऐंठता तू किसलिए इतना रहा,
एक तिनका है बहुत तेरे लिए।
इसी प्रकार की चेतावनी कबीर ने भी दी है-
तिनका कबहूँ न निंदिए, पाँव तले जो होय।
कबहूँ उडि़ आँखिन परै, पीर घनेरी होय।।
इन दोनों में क्या समानता है और क्या अंतर? लिखिए।
दोनों में समानता-
(1) दोनों ही दोहों में बताया गया है कि तिनके में कितनी ताकत होती है। एक तिनका किसी को भी परेशानी में डाल सकता है।
(2) छोटा सा तिनका किसी को भी मुश्किल में डालने के लिए काफी है।
(3) तिनके को शक्तिहीन न समझने की चेतावनी दी गयी है|
दोनों में अंतर-
(1) पहले काव्यांश में तिनके द्वारा मनुष्य को कष्ट देने के उद्देश्य का संकेत नहीं है जबकि दूसरे में स्पष्ट रूप में इसका संकेत है|
(2) पहले काव्यांश में घमंड न करने को कहा गया है वहीं दूसरे वाक्यांश में तिनके की निंदा न करने को कहा गया है।
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