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इस कविता को कवि ने ‘मैं’ से आरंभ किया है- ‘मैं घमंडों में भरा ऐंठा हुआ।’ कवि का यह ‘मैं’ कविता पढ़नेवाले व्यक्ति से भी जोड़ सकता है और तब अनुभव यह होगा कि कविता पढ़नेवाला व्यक्ति अपनी बात बता रहा है। यदि कविता में ‘मैं’ की जगह ‘वह’ या कोई नाम लिख दिया जाए, तब कविता के वाक्यों में बदलाव आ जाएगा। कविता में ‘मैं’ के स्थान पर ‘वह’ या कोई नाम लिखकर वाक्यों के बदलाव को देखिए और कक्षा में पढ़कर सुनाइए।

‘मैं’ के स्थान पर ‘राम’ रखने पर वाक्यों में बदलाव-

(1) राम घमंडों से भरा ऐंठा हुआ।


(2) राम झिझक उठा, हुआ बेचैन-सा,


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घमंडी की आँख से तिनका निकालने के लिए उसके आसपास के लोगों ने क्या किया?

5

एक तिनका’ कविता में घमंडी को उसकी ‘समझ’ ने चेतावनी दी-

ऐंठता तू किसलिए इतना रहा,


एक तिनका है बहुत तेरे लिए।


इसी प्रकार की चेतावनी कबीर ने भी दी है-


तिनका कबहूँ न निंदिए, पाँव तले जो होय।


कबहूँ उडि़ आँखिन परै, पीर घनेरी होय।।


इन दोनों में क्या समानता है और क्या अंतर? लिखिए।


2

नीचे दी गई पंक्तियों को ध्यान से पढि़ए

ऐंठ बेचारी दबे पाँवों भगी,


तब समझ’ ने यों मुझे ताने दिए।


इन पंक्तियों में ‘ऐंठ’ और ‘समझ’ शब्दों का प्रयोग सजीव प्राणी की भांति हुआ है। कल्पना कीजिए, यदि ‘ऐंठ’ और ‘समझ’ किसी नाटक में दो पात्र होते तो उनका अभिनय कैसा होता?


3

नीचे दी गई कबीर की पंक्तियों में तिनका शब्द का प्रयोग एक से अधिक बार किया गया है। इनके अलग-अलग अर्थों की जानकारी प्राप्त करें।

उठा बबूला प्रेम का, तिनका उड़ा अकास।


तिनका-तिनका हो गया, तिनका तिनके पास।।