मान लो कि तुम छोटू हो और यह कहानी किसी को सुना रहे हो तो कैसे सुनाओगे? सोचो और ‘मैं’ शैली (आत्मकथात्मक शैली) में यह कहानी सुनाओ।
मैं हमेशा इस ताक में रहती थी कि कब पापा का सिक्योरिटी कार्ड मेरे हाथ लगे और मैं सुरंग के रास्ते से जाऊं। एक दिन पापा का सिक्योरिटी कार्ड मेरे हाथ लग ही गया। मैंने झट से उठाया और सुरंग की ओर बढ़ गया। अंदर घनघोर अंधेरा था। मुझे इस बात का अंदाजा नहीं था कि सुरंग में यंत्र लगे हैं जो मेरी तस्वीर खींच रहे हैं। यंत्रों को खतरों का आभास हुआ तभी सुरक्षा गार्ड आ गए। उन्होंने मुझे वापस घर प भेज दिया। उस दिन मां तो मारने वाली थीं लेकिन पापा ने बचा लिया। उन्होंने ही बताया कि वह सुरंगनुमा रास्ता मंगल की धरती के ऊपर जाता है। वहां आम आदमी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के जीवित नहीं रह सकता। यहां पर हमारा जीवन कुछ विशेष यंत्रें की सहायता पर टिका हुआ है। इन्हीं यंत्रों की देखरेख का काम करने पापा उस सुरंगनुमा रास्ते से जाया करते हैं। एक दिन पापा मुझे अपना कंट्रोल रूम दिखाने ले गए। मैं बहुत खुश था। उन्होंने कंप्यूटर स्क्रीन पर मुझे एक अंतरिक्ष यान दिखाया। वह किसी अनजान जगह से आया था और हमारे मंगल ग्रह पर उतर गया था। किसी को उसके बारे में सही जानकारी नहीं थी। बस सब उसे देखे ही जा रहे थे। उस यान से एक मशीनी हाथ जैसा कुछ निकला। वह शायद मंगल की मिट्टी निकालना चाहता था। मेरा ध्यान वहां पर नहीं था। मैंने लाल रंग के बटन को दबा दिया। तभी कहीं से घंटी की आवाज आई और पापा ने मुझे जोर से एक थप्पड़ मारा। थोड़ी देर में मैंने उन्हें बात करते सुना। उस अंतरिक्ष यान का मशीनी हाथ खराब हो गया था। सब सांस रोकर उसे देख रहे थे। थोड़ी देर में वह अपने आप ही ठीक हो गया। उसने मंगल की मिट्टी उठाई और वापस उड़कर चला गया। किसी को पता नहीं चला कि वह कहाँ से आया था और उसने हमारी मिट्टी ले जाकर उसका क्या किया।
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