‘अपना दुख भी एक है साथी, अपना सुख भी एक’ कक्षा, मोहल्ले और गाँव/शहर के किस-किस तरह के साथियों के बीच तुम्हें इस वाक्य की सच्चाई महसूस होती है और कैसे?
जब महीने की आखिरी तारीख को अकाउंट में सैलरी आती है तो मेरे लिए सबसे बड़ा सुख वही होता है। उस दिन मन एकदम शांत रहता है। किसी भी तरह की कोई परेशानी दिमाग में नहीं घूमती। जैसे-जैसे महीने की 15 तारीख आती है फिर से परेशानियां दिमाग में आने लगती है। ऐसा लगता है कि सारी तकलीफें सिर्फ हमारे ही पास है। यह एक ऐसी चीज है जो मुझे लगता है कि हर शख्स के साथ होती होगी। यह लाइन सबके साथ फिट बैठती है ‘अपना दुख भी एक है साथी, अपना सुख भी एक।‘
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