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बातचीत करते समय हमारी बातें हाथ की हरकत से प्रभावशाली होकर दूसरे तक पहुँचती हैं। हाथ की हरकत से या हाथ के इशारे से भी कुछ कहा जा सकता है। नीचे लिखे हाथ के इशारे किन अवसरों पर प्रयोग होते हैं? लिखो-

(1) ‘क्यों’ पूछते हाथ-जब कोई दूर बैठा हो या फिर सबसे सामने उस व्यक्ति से कुछ कह नहीं सकते हैं तो हाथ से ‘क्यों’ पूछने का इशारा करते हैं।


(2) बुलाते हाथ – किसी को बुलाने के लिए बुलाते हाथ का इशारा करते हैं।


(3) मना करते हाथ- किसी काम को मना करने के लिए मना करते हाथ का इशारा करते हैं।


(4) समझाते हाथ- कुछ समझाने के लिए समझाते हाथ का इशारा करते हैं।


(5) आरोप लगाते हाथ- किस पर आरोप लगाने के लिए उंगुली से उसकी तरफ इशारा करते हैं।


(6) जोश दिखाते हाथ- जोश दिखाने के लिए मुट्ठी बांधकर जब इशारा करते हैं तो उसे जोश दिखाते हाथ कहते हैं।


(7) चेतावनी देते हाथ- किसी को चेतावनी देते हैं तो उंगुली दिखाते हुए इशारा करते हैं।


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2

नीचे हाथ से संबंधित कुछ मुहावरे दिए गए हैं। इनके अर्थ समझो और प्रत्येक मुहावरे से वाक्य बनाओ।

(क) हाथ को हाथ न सूझना


(ख) हाथ साफ करना


(ग) हाथ-पैर फूलना


(घ) हाथों-हाथ लेना


(घ) हाथ लगाना


1

हाथ’ और ‘हस्त’ एक ही शब्द के दो रूप हैं। नीचे दिए गए शब्दों में ‘हस्त’ और ‘हाथ’ छिपे हैं। शब्दों को पढ़कर बताओ कि हाथों का इनमें क्या काम है-

2

इस गीत में परबत, सीस, रस्ता, इंसाँ जैसे शब्दों के प्रयोग हुए हैं। इन शब्दों के प्रचलित रूप लिखो।

3

कल गैरों की खातिर की, आज अपनी खातिर करना’ इस वाक्य को गीतकार इस प्रकार कहना चाहता है- (तुमने) कल गैरों की खातिर (मेहनत) की, आज (तुम) अपनी खातिर करना। इस वाक्य में ‘तुम’ कर्ता है जो गीत की पंक्ति में छंद बनाए रखने के लिए हटा दिया गया है। उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द ‘अपनी’ का प्रयोग कर्ता ‘तुम’ के लिए हो रहा है, इसलिए यह सर्वनाम है। ऐसे सर्वनाम जो अपने आप के बारे में बताएँ निजवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। (निज का अर्थ ‘अपना’ होता है।) निजवाचक सर्वनाम के तीन प्रकार होते हैं, जो नीचे दिए वाक्यों में रेखांकित हैं-

मैं अपने आप (या आप) घर चली जाऊँगी।


बब्बन अपना काम खुद करता है।


सुधा ने अपने लिए कुछ नहीं खरीदा।


अब तुम भी निजवाचक सर्वनाम के निम्नलिखित रूपों का वाक्यों में प्रयोग करो-