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हाथ’ और ‘हस्त’ एक ही शब्द के दो रूप हैं। नीचे दिए गए शब्दों में ‘हस्त’ और ‘हाथ’ छिपे हैं। शब्दों को पढ़कर बताओ कि हाथों का इनमें क्या काम है-

(1) हाथघड़ी- इसे हाथ की कलाई पर पहनते हैं।

(2) निहत्था- जिसके हाथ में कोई भी हथियार न हो उस व्यक्ति को निहत्था कहते हैं।


(3) हथौड़ा- लोहे का औजार जिसे दीवार में कील ठोकने में मदद मिलती है।


(4) हथकंडा- गलत तरीके से काम कराने को हथकंडा कहते हैं।


(5) हस्तशिल्प – हाथ से जो कपड़े में कारीगरी की जाती है उस शिल्पकारी को हस्तशिल्प कहते हैं।


(6) हस्ताक्षर- अपना नाम लिखकर पेपर पर जो साइन किए जाते हैं उसे हस्ताक्षर कहते हैं। इसका मतलब यह होता है कि आपने पेपर पर लिखी बातों को सहमति दी है।


(8) हस्तक्षेप-किसी भी काम में दखल देने को हस्तक्षेप कहते हैं।


(9) हथकरघा- लघु और घरेलू उद्योगों को हथकरघा कहते हैं।


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1

अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।

एक और एक मिलकर ग्यारह होते हैं।


(क) ऊपर लिखी कहावतों का अर्थ गीत की किन पंक्तियों से मिलता-जुलता है?


(ख) इन दोनों कहावतों के अर्थ कहावत-कोश में देखकर समझो और उनका वाक्यों में प्रयोग करो।


2

नीचे हाथ से संबंधित कुछ मुहावरे दिए गए हैं। इनके अर्थ समझो और प्रत्येक मुहावरे से वाक्य बनाओ।

(क) हाथ को हाथ न सूझना


(ख) हाथ साफ करना


(ग) हाथ-पैर फूलना


(घ) हाथों-हाथ लेना


(घ) हाथ लगाना


2

इस गीत में परबत, सीस, रस्ता, इंसाँ जैसे शब्दों के प्रयोग हुए हैं। इन शब्दों के प्रचलित रूप लिखो।

3

कल गैरों की खातिर की, आज अपनी खातिर करना’ इस वाक्य को गीतकार इस प्रकार कहना चाहता है- (तुमने) कल गैरों की खातिर (मेहनत) की, आज (तुम) अपनी खातिर करना। इस वाक्य में ‘तुम’ कर्ता है जो गीत की पंक्ति में छंद बनाए रखने के लिए हटा दिया गया है। उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द ‘अपनी’ का प्रयोग कर्ता ‘तुम’ के लिए हो रहा है, इसलिए यह सर्वनाम है। ऐसे सर्वनाम जो अपने आप के बारे में बताएँ निजवाचक सर्वनाम कहलाते हैं। (निज का अर्थ ‘अपना’ होता है।) निजवाचक सर्वनाम के तीन प्रकार होते हैं, जो नीचे दिए वाक्यों में रेखांकित हैं-

मैं अपने आप (या आप) घर चली जाऊँगी।


बब्बन अपना काम खुद करता है।


सुधा ने अपने लिए कुछ नहीं खरीदा।


अब तुम भी निजवाचक सर्वनाम के निम्नलिखित रूपों का वाक्यों में प्रयोग करो-