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सड़क के किनारे एक सुंदर फ्रलैट में बैठक का दृश्य। उसका एक दरवाजा सड़क वाले बरामदे में खुलता है------ उस पर एक फ़ोन रखा है।’ इस बैठक की पूरी तसवीर बनाओ।

विद्यार्थी दिए गए चित्र को बनाने का प्रयास करें।


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2

माँ मोहन के ‘ऐसे-ऐसे’ कहने पर क्यों घबरा रही थी?

3

ऐसे कौन-कौन से बहाने होते हैं जिन्हें मास्टर जी एक ही बार में सुनकर समझ जाते हैं? ऐसे कुछ बहानों के बारे में लिखो।

1

स्कूल के काम से बचने के लिए मोहन ने कई बार पेट में ‘ऐसे-ऐसे’ होने के बहाने गनाए। मान लो, एक बार एसे सचमुच पेट में दर्द हो गया और उसकी बातों पर लोगों ने विश्वास नहीं किया, तब मोहन पर क्या बीती होगी?

2

पाठ में आए वाक्य-‘लोचा-लोचा फिर है’ के बदले ‘ढीला-ढाला हो गया है’ या ‘बहुत कमजोर हो गया है’ लिखा जा सकता है। लेकिन लेखक ने संवाद में विशेषता लाने के लिए बोलियों के रंग-ढंग का उपयोग किया है। इस पाठ में इस तरह की अन्य पंक्तियाँ भी हैं, जैसे-

- इत्ती नयी-नयी बीमारियाँ निकली हैं,


- राम मारी बीमारियों ने तंग कर दिया,


- तेरे पेट में तो बहुत बड़ी दाढ़ी है।


अनुमान लगाओ, इन पंक्तियों को दूसरे ढंग से कैसे लिखा जा सकता है?