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स्कूल के काम से बचने के लिए मोहन ने कई बार पेट में ‘ऐसे-ऐसे’ होने के बहाने गनाए। मान लो, एक बार एसे सचमुच पेट में दर्द हो गया और उसकी बातों पर लोगों ने विश्वास नहीं किया, तब मोहन पर क्या बीती होगी?

स्कूल के काम से बचने के लिए मोहन ने पेट में ऐसे—ऐसे होने का बहाना किया। इससे उसके मां—बाप काफी डर गए थे। अगर कभी सच में ऐसा होता तो उसकी बातों पर मां—बाप यकीन ना करते। सबको लगता कि ये पहले की तहर ही करने से बचने के लिए ना बहाना कर रहा है। इस बार मोहन के पिता डॉक्टर को भी ना बुलाते, जिससे बीमारी का भी पता ना लग पाता। इससे मोहन की तबीयत ज्यादा खराब होने का डर रहता। मोहन को इस घटना से सबक लेने की जरूरत है जिससे आगे कभी ऐसी स्थिति पैदा ना हो।


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माँ मोहन के ‘ऐसे-ऐसे’ कहने पर क्यों घबरा रही थी?

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ऐसे कौन-कौन से बहाने होते हैं जिन्हें मास्टर जी एक ही बार में सुनकर समझ जाते हैं? ऐसे कुछ बहानों के बारे में लिखो।

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पाठ में आए वाक्य-‘लोचा-लोचा फिर है’ के बदले ‘ढीला-ढाला हो गया है’ या ‘बहुत कमजोर हो गया है’ लिखा जा सकता है। लेकिन लेखक ने संवाद में विशेषता लाने के लिए बोलियों के रंग-ढंग का उपयोग किया है। इस पाठ में इस तरह की अन्य पंक्तियाँ भी हैं, जैसे-

- इत्ती नयी-नयी बीमारियाँ निकली हैं,


- राम मारी बीमारियों ने तंग कर दिया,


- तेरे पेट में तो बहुत बड़ी दाढ़ी है।


अनुमान लगाओ, इन पंक्तियों को दूसरे ढंग से कैसे लिखा जा सकता है?


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मान लो कि तुम मोहन की तबीयत पूछने जाते हो? तुम अपने और मोहन के बीच की बातचीत को संवाद के रूप में लिखो।