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मास्टर- स्कूल का काम तो पूरा कर लिया है?

(मोहन ‘हाँ’ में सिर हिलाता है।)


मोहन- जी, सब काम पूरा कर लिया है।


इस स्थिति में नाटक का अंत क्या होता? लिखो।


अगर मोहन, मास्टर जी से ये कहता कि उसने स्कूल का सारा काम कर लिया है तो नाटक का अंत कुछ और ही होता। मास्टर जी समझ जाते कि मोहन नाटक नहीं कर रहा है। उसके पेट में सच में दर्द हो रहा है। साथ ही मास्टर जी उसे दो—चार दिन की छुट्टी दे देते जिससे वो पूरी तरह से ठीक होकर स्कूल आ सके। साथ ही उसके माता—पिता भी उसका खूब ख्याल रखते।


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2

पाठ में आए वाक्य-‘लोचा-लोचा फिर है’ के बदले ‘ढीला-ढाला हो गया है’ या ‘बहुत कमजोर हो गया है’ लिखा जा सकता है। लेकिन लेखक ने संवाद में विशेषता लाने के लिए बोलियों के रंग-ढंग का उपयोग किया है। इस पाठ में इस तरह की अन्य पंक्तियाँ भी हैं, जैसे-

- इत्ती नयी-नयी बीमारियाँ निकली हैं,


- राम मारी बीमारियों ने तंग कर दिया,


- तेरे पेट में तो बहुत बड़ी दाढ़ी है।


अनुमान लगाओ, इन पंक्तियों को दूसरे ढंग से कैसे लिखा जा सकता है?


3

मान लो कि तुम मोहन की तबीयत पूछने जाते हो? तुम अपने और मोहन के बीच की बातचीत को संवाद के रूप में लिखो।

4

संकट के समय के लिए कौन-कौन से नंबर याद रखे जाने चाहिए? ऐसे वक्त में पुलिस, फ़ायर ब्रिगेड और डॉक्टर से तुम कैसे बात करोगे? कक्षा में करके बताओ।

1

(क) मोहन ने केला और संतरा खाया।

(ख) मोहन ने केला और संतरा नहीं खाया।


(ग) मोहन ने क्या खाया?


(घ) मोहन केला और संतरा खाओ।


उपर्युक्त वाक्यों में से पहला वाक्य एकांकी से लिया गया है। बाकी तीन वाक्य देखने में पहले वाक्य से मिलते-जुलते हैं, पर उनके अर्थ अलग-अलग हैं। पहला वाक्य किसी कार्य या बात के होने के बारे में बताता है। इसे विधिवाचक वाक्य कहते हैं। दूसरे वाक्य का संबंध उस कार्य के न होने से है, इसलिए उसे निषेधवाचक वाक्य कहते हैं (निषेध का अर्थ नहीं या मनाही होता है)। तीसरे वाक्य में इसी बात को प्रश्न के रूप में पूछा जा रहा है, ऐसे वाक्य प्रश्नवाचक वाक्य कहलाते हैं। चौथे वाक्य में मोहन से उसी कार्य को करने के लिए कहा जा रहा है। इसलिए उसे आदेशवाचक वाक्य कहते हैं। आगे एक वाक्य दिया गया है। इसके बाकी तीन रूप तुम सोचकर लिखो-


बताना (विधिवाचक वाक्य): रुद्र ने कपड़े अलमारी में रखे।