देश की सीमा पर बैठे फौजी किस तरह की कठिनाइयों से जूझते हैं? उनके प्रति हमारा क्या उत्तरदायित्व होना चाहिए?
देश की सीमा पर बैठे सैनिक मुख्यत: सियाचिन ग्लैशियर में तैनाती होने वहाँ की विपरीत मौसम वाली चुनौतीपूर्ण कठिनाइयों से जूझते हैं। वहाँ का तापमान सर्दी के मौसम में शून्य से काफी नीचे चला जाता है। हमारे देश की उत्तरी सीमा यानि हिमालय क्षेत्र में सियाचीन के अलावा अन्य सेक्टरों पर भी मौसम विपरीत ही होता है और इन स्थानों पर भी हमारे सैनिक कमोबेश समान कठिनाईयों से गुजरते हैं। पश्चिमी सीमा पर एकदम उलट स्थिति होने से यहाँ गर्मियों में हमारे सैनिकों का बुरा हाल रहता है। इस प्रकार की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी अपने स्थान पर डंटे रहते हैं और हर एक परिस्थिति में देश की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं| वे देश की रक्षा करते हैं और इसी कारण से देश के भीतर हम पूर्णतः सुरक्षित एवं शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत कर पाते हैं|
इसलिए उनके प्रति हमारा काफी दायित्व बनता जिस प्रकार से वे हमारे देश एवं हमारी सुरक्षा में तत्पर रहते हैं उसी प्रकार से हमें भी उनकी मदद ल के लिए तत्पर रहना चाहिए और देश के प्रति अपने कर्तव्यों को ईमानदारी एवं तत्परता से निभाना चाहिए|
Couldn't generate an explanation.
Generated by AI. May contain inaccuracies — always verify with your textbook.