गोपाल प्रसाद विवाह को ‘बिजनेस’ मानते हैं और रामस्वरूप अपनी बेटी की उच्च शिक्षा छिपाते हैं। क्या आप मानते हैं कि दोनों ही समान रूप से अपराधी हैं? अपने विचार लिखें।
मेरे विचार से दोनों ही समान रूप से अपराधी हैं-गोपाल प्रसाद विवाह जैसे पवित्र बंधन में भी बिजनेस खोज रहे थे वे इस तरह के आचरण से इस संबंध की मधुरताएँ तथा संबंधों की गरिमा को भी कम कर रहे थे। आधुनिक विचार रखने वाले तथा शिक्षा के प्रति स्वस्थ दृष्टिकोण रखने वाले रामस्वरूप ने बेटी उमा को उच्च शिक्षा दिलवाई ताकि उच्च शिक्षा प्राप्त होने पर उनकी बेटी का विवाह अत्यंत आसानी से हो जाएगा, पर अंततः उन्हें अपनी सोच बदलनी पड़ी। उधर गोपाल प्रसाद वकील होकर भी रूढ़िवादी विचारों वाले व्यक्ति हैं। उनका मानना है कि उच्च शिक्षा प्राप्त लड़की घर के लिए अच्छी नहीं होती। इसलिए रामस्वरूप, गोपाल प्रसाद से अपेक्षाकृत कम अपराधी हैं क्योंकि परिस्थितियों से विवश होकर उन्होंने झूठ बोला। हालाँकि झूठ बोलना भी अपराध है। रामस्वरूप जहाँ आधुनिक सोच वाले व्यक्ति होने के बावजूद कायरता का परिचय दे रहे थे। वे चाहते तो अपनी बेटी के साथ मजबूती से खड़े होते और एक स्वाभिमानी वर की तलाश करते न कि मज़बूरी में आकर परिस्तिथि से समझौता करते। इस प्रकार गोपाल प्रसाद विवाह को ‘बिजनेस’ मानना और रामस्वरूप का अपनी बेटी की उच्च शिक्षा छिपाना ये दोनों व्यक्ति समान रूप से अपराधी हैं| इनके अपराध में कोई अंतर नहीं है|
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