‘रीढ़ की हड्डी’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
मानव में रीढ़ की हड्डी महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। मानव शरीर को सीधा खड़ा होने के लिए रीढ़ की हड्डी का मजबूत होना बहुत आवश्यक है। जिस प्रकार वैवाहिक रिश्तों में लड़का और लड़की दोनों का एक समान, प्रगतिशील सोच वाला और स्वतंत्र होना आवश्यक है| ठीक इसी प्रकार से समाज के चतुर्दिक विकास के लिए स्त्रियों का शिक्षित और आत्मनिर्भर होना आवश्यक है। उनके स्वस्थ रिश्ते पारिवारिक शान्ति, अपनेपन और समृद्धि का कारण बनते है। समाज में नारी को उचित स्थान न मिल पाना, समाज की रीढ़ की हड्डी को कमजोर करता है। नारी की उन्नति तथा समाज में नारी को उचित स्थान दिए बिना समाज मजबूत नहीं हो सकता है। इस पाठ के जरिए यही बताने का प्रयास किया गया है कि नर और नारी दोनों को समान माना जाना चाहिए| उमा के विवाह के लिए रामस्वरूप जो रिश्ता तय करते हैं उस लड़के (शंकर) की कमर भी झुकी रहती है। उसकी शारीरिक बनावट भी बहुत अच्छी नहीं है| ऐसा लगता है कि उसकी बैकबोन (रीढ़ की हड्डी) झुकी हुई है। इसके अलावा शंकर के चरित्र की कमजोरी को भी रीढ़ की हड्डी न होने की बात कह कर उभारा गया है। नारी को कमतर समझ कर हम एक प्रगति शील समाज की कल्पना नहीं कर सकते। अतः ‘रीढ़ की हड्डी’ एक उचित शीर्षक है|
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