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माटी वाली के पास अपने अच्छे या बुरे भाग्य के बारे में ज्यादा सोचने का समय क्यों नहीं था?

माटी वाली पूरे शहर के घरों में मिट्टी पहुंचाती थी। इसके लिए वो सुबह घर से निकलती और लौटते—लौटते रात हो जाती थी। इस बीच उसे मिट्टी के अलावा किसी अन्य बात के बारे सोचने का समय नहीं मिलता था। साथ ही वो एक गरीब बूढ़ी महिला थी। जो अपने पति के लिए दो रोटी भी कमाती थी। अपनी इसी दिनचर्या को वह नियति मानकर चले जा रही थी। ऐसे में माटी वाली के पास अच्छे और बुरे भाग्य के बारे में सोचने का समय नहीं था।


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