‘भूख मीठी कि भोजन मीठा’ से क्या अभिप्राय है?
लेखक ने इस कहावत का पाठ में दो बार उल्लेख किया है। एक तब जब ठकुराइन उसे चाय और रोटी खाने को देती है। दूसरा तब जब माटी वाली अपने पति को खाना खिलाने के बारे में सोचती है। भूख और भोजन का आपस में गहरा सम्बन्ध है। स्वाद भोजन में नहीं बल्कि मनुष्य को लगने वाली भूख से होता है। भूख लगने पर रूखा-सूखा जैसा भी भोजन मिल जाए वही स्वादिष्ट लगता है। भूख न होने पर स्वादिष्ट भोजन भी बे-स्वाद लगता है।
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