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माटी वाली का रोटियों का इस तरह हिसाब लगाना उसकी किस मजबूरी को प्रकट करता है?

जब ठकुराइन ने माटी वाली को दो रोटियां दीं तो उसने एक चुपचाप से अपने पास रखे एक कपड़े में छिपा ली। वहीं जब उसे दूसरे घर से दो और रोटियां मिलीं तो वो भी उसने रख लीं। ऐसे में घर लौटते समय उसके पास तीन रोटियां थीं। तब वो हिसाब लगाती है घर जाकर पति को दो रोटी दे दूंगी| पति की उम्र हो चली है इसलिए वो ज्यादा से ज्यादा एक या डेढ़ रोटी ही खा पाएंगे। बाकी बची डेढ़ रोटी वो खा लेगी। इससे पता चलता है कि माटी वाली की आर्थिक हालत बहुत खराब थी। वो माटी बेचकर जो कुछ कमाती उसी से उसका और पति का पेट भरता था।


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