‘गरीब आदमी का शमशान नहीं उजड़ना चाहिए।’ इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
एक दिन जब माटी वाली घर पहुंचती है तो देखती है कि उसके पति की मृत्यु हो चुकी है। माटी वाली का एक अकेला सहारा छिन जाता है और उसे पति के अंतिम संस्कार की चिंता होती है। बांध टूटने से सारे शमशान पानी में डूब चुके थे। पुलिस वाले भी उसकी कोई मदद नहीं करते। वो अपने पति के शव को झोपड़ी में ही रखती है और खुद बाहर आकर बैठ जाती है। उसके पास से जब कोई गुजरता है तो दुःख के आवेश में वह यह वाक्य कहती है। क्योंकि इस वक्त उसका घर ही श्मशान बन जाता है। अब वो ये नहीं चाहती कि उसका घर भी उजड़ जाए। वो अपने घर को शमशान की तरह संबोधित करती है।
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