लेखक को अंग्रेजी में कविता लिखने का अफ़सोस क्यों रहा होगा?
लेखक एक जाट परिवार से ताल्लुक रखते थे। घर में भी हिंदी बोलने का माहौल था। पढ़ाई के दौरान लेखक ने कुछ अंग्रेजी कविताएं लिखी थीं। इन कविताओं में हिंदी भाषा जैसी मिठास नहीं नहीं होती। साथ ही हर कोई उसे समझ भी नहीं पाता। लेखक की मातृ भाषा हिंदी होने की वजह से वो भी अंग्रेजी कविताओं से जुड़ाव महसूस नहीं कर पा रहे होंगे। साथ ही जब वे इलाहाबाद आए तो वहाँ बच्चन, निराला और पन्त जैसे महान लेखकों का सानिध्य मिला। वे हिन्दी लेखन की ओर अग्रसर होने लगे और हिन्दी में ही रचनाएँ करने लगे। इस प्रकार लेखक का अंग्रेजी में लिखने का प्रयास व्यर्थ गया जिसका शायद उन्हें अफ़सोस रहा होगा|
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