लेखक ने अपने जीवन में जिन कठिनाइयों को झेला है, उनके बारे में लिखिए।
लेखक ने पाठ की शुरुआत ही बताया कि उनका जीवन संघर्ष के बीच गुजर रहा था। इसी वजह से उन्हें अपना घर छोड़कर दिल्ली आना पड़ा। पाठ पढ़ने पर हमें लेखक के जीवन की कई और कठिनाइयों के बारे में पता चलता है -
बेरोजगारी के दिनों में परिवा वालों के कटु बाणों को झेलना पड़ता था। लेखक को अपने प्रारम्भ के दिनों में आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ा था। साइन बोर्ड पेंट करके अपना गुजारा चलाना पड़ता था।
लेखक की पत्नी का टीबी के कारण देहांत हो गया था और वे युवावस्था में ही विधुर हो गए। इसलिए उन्हें पत्नी वियोग की पीड़ा को भी झेलना पड़ा।
दिल्ली में पढ़ाई करने के बाद भी जब काम नहीं मिला तो उनके ससुरालवालों ने कंपाउंडरी का काम दिलाया।
बच्चनजी के आग्रह पर जब वे इलाहाबाद आए तब भी वे आर्थिक समस्या से जूझ रहे थे। बच्चनजी ने उनकी पढ़ाई का सारा खर्चा उठाया था। इस प्रकार से हम कह सकते हैं कि लेखक की जिंदगी का समय बहुत ही कठिनाई, आर्थिक, पारिवारिक एवं अन्य समस्याओं के बीच गुजरा|
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