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संस्कृत साहित्य के महाकवि कालिदास ने बादल को संदेशवाहक बनाकर ‘मेघदूत’ नाम का काव्य लिखा है। ‘मेघदूत’ के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।

मेघदूत दुनिया के सबसे लोकप्रिय कवि एवं नाटककार कालिदास की रचना है। यह काव्य संस्कृत भाषा में लिखी गई है।

कालिदास की यह रचना अलकापुरी नरेश कुबेर और उसके सेवक पर आधारित है। कुबेर के दरबार में कई सेवक रहते थे। सभी सेवक दिन रात कुबेर की सेवा में हाजिर रहते थे। उन्हीं में से एक सेवक ऐसा भी था जिसका नया-नया विवाह हुआ था। अपनी पत्नी के साथ सेवक काफी खुश रहता था। लेकिन पत्नी के साथ ज्यादा समय बिताने की वजह से कुबेर की सेवा पहले की तरह नहीं कर पा रहा था। इस वजह से एक दिन कुबेर क्रोधित हो गए और उन्होंने सेवक को अपनी पत्नी से दूर रहने का श्राप दे दिया। सेवक अब अपनी नवविवाहिता पत्नी से अलग रामगिरि पर्वत पर रहने लगा। रामगिरी पर्वत पर वह अपनी पत्नी को बहुत याद किया करता था। वर्षा ऋतु आई तो वह आकाश में डोलते काले बादलों को देखकर अपनी पत्नी को याद करने लगा। वह इन्हीं काले बादलों अर्थात मेघ को दूत बनाकर अपनी पत्नी के पास गया। इस दौरान उसे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कुबेर से सेवक की यह दशा देखी नहीं गई और उसने सेवक को श्रापमुक्त कर दिया। इसके बाद सेवक खुशी-खुशी अपनी पत्नी के साथ अलकापुरी आ गया। इसी कथा का मेघदूत नामक काव्य में सुंदर वर्णन है।


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ऐसा क्यों होता था कि महात्मा गाँधी को दुनियाभर से पत्र ‘महात्मा गाँधी-इंडिया’ पता लिखकर आते थे?

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रामधारी सिंह दिनकर की कविता भगवान के डाकिये आपकी पाठ्यपुस्तक में है। उसके आधार पर पक्षी और बादल को डाकिये की भाँति मानकर अपनी कल्पना से लेख लिखिए।

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पक्षी को संदेशवाहक बनाकर अनेक कविताएँ एवं गीत लिखे गए हैं। एक गीत हैं।- ‘जा-जा रे कागा विदेशवा, मेरे पिया से कहियो संदेशवा’। इस तरह के तीन गीतों का संग्रह कीजिए। प्रशिक्षित पक्षी के गले में पत्र बाँधकर निर्धारित स्थान तक पत्र भेजने का उल्लेख मिलता है। मान लीजिए आपको एक पक्षी को संदेशवाहक बनाकर पत्र भेजना हो तो आप वह पत्र किसे भेजना चाहेगें और उसमें क्या लिखना चाहेंगे।

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केवल पढ़ने के लिए दी गई रामदरश मिश्र की कविता ‘चिट्ठियाँ’ को ध्यानपूर्वक पढि़ए और विचार कीजिए कि क्या वह कविता केवल लेटर-बॉक्स में पड़ी निर्धारित पते पर जाने के लिए तैयार चिट्ठियों के बारे में है? या रेल के डिब्बे में बैठी सवारी भी उन्हीं चिट्ठियों की तरह हैं जिनके पास उनके गंतव्य तक का टिकट है। पत्र के पते की तरह क्या विद्यालय भी एक लेटर-बॉक्स की भाँति नहीं है जहाँ से उत्तीर्ण होकर विद्यार्थी अनेक क्षेत्रें में चले जाते हैं? अपनी कल्पना को पंख लगाइए और मुक्त मन से इस विषय में विचार-विमर्श कीजिए।