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पहला बोलता सिनेमा बनाने के लिए फिल्मकार अर्देशिर एम- ईरानी को प्रेरणा कहां से मिली? उन्होंने ‘आलम आरा’ फिल्म के लिए आधार कहां से लिया? विचार व्यक्त कीजिए।

14 मार्च 1931 ही वो ऐतिहासिक तारीख है जब सिनेमा ने पहली बार बोलना सीखा था। फिल्मकार अर्देशिर ने आलम आरा को पहली बोलती फिल्म के तौर पर रिलीज किया था। इस फिल्म को बनाने की प्रेरणा उन्हें एक हॉलीवुड फिल्म से मिली थी। अर्देशिर ने 1929 में हॉलीवुड की बोलती फिल्म शो बोट देखी। तब उनके मन में बोलती फिल्म बनाने की इच्छा जागी। पारसी रंगमंच के एक लोकप्रिय नाटक को आधार बनाकर उन्होंने अपनी फिल्म की पटकथा बनाई। इस नाटक के कई गाने बिना किसी बदलाव के, ज्यों के त्यों फिल्म में ले लिए गए थे|


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1

जब पहली बोलती फिल्म प्रदर्शित हुई तो उसके पोस्टरों पर कौन-से वाक्य छापे गए? उस फिल्म में कितने चेहरे थे? स्पष्ट कीजिए।

3

विट्ठल का चयन ‘आलम आरा’ फिल्म के नायक के रूप में हुआ लेकिन उन्हें हटाया क्यों गया? विट्ठल ने पुनः नायक होने के लिए क्या किया? विचार प्रकट कीजिए।

4

पहली सवाक् फिल्म के निर्माता-निर्देशक अर्देशिर को जब सम्मानित किया गया तब सम्मानकर्ताओं ने उनके लिए क्या कहा था? अर्देशिर ने क्या कहा? और इस प्रसंग में लेखक ने क्या टिप्पणी की है? लिखिए।

1

मूक सिनेमा में संवाद नहीं होते, उसमें दैहिक अभिनय की प्रधानता होती है। पर जब सिनेमा बोलने लगा तो उसमें अनेक परिवर्तन हुए। उन परिवर्तनों को अभिनेता, दर्शक और कुछ तकनीकी दृष्टि से पाठ का आधार लेकर खोजें, साथ ही अपनी कल्पना का भी सहयोग लें।