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डब फिल्म’ किसे कहते हैं? कभी कभी डब फिल्मों में अभिनेता के मुंह खोलने और आवाज में अंतर आ जाता है। इसका कारण क्या हो सकता है?

बोलती फिल्मों में डब का इस्तेमाल किया जाता है। शूटिंग के समय संवाद ठीक से सुनाई नहीं देते। पीछे कई तरह की अन्य आवाजें भी आती हैं। इसलिए अलग से अभिनेता डायलॉग को डब करते हैं। जिन्हें बाद में अभिनेता की आवाज के साथ मैच कर दिया जाता है। अलग अलग भाषाओं में फिल्में रिलीज करने के लिए डब का इस्तेमाल किया जाता है।

कभी-कभी फिल्मों में अभिनेता के मुंह खोलने और आवाज में अंतर आ जाता है। इसकी बड़ी वजह तकनीकी खराबी है। जब डब आवाज को अभिनेता की आवाज के साथ बैठाया जाता है तो उसमें कुछ कमी रह जाती है। तब डायलॉग और अभिनेता के मुंह खोलने में अंतर साफ दिखता है। इसके अलावा अभिनय और संवाद संयोजन में कमी, संयोजनकर्ता का पूरी तरह दक्ष न होना, डब आवाज तथा अभिनय करने वाले के मुंह खेलने-बंद करने की असमान गति और अभिनेता की तालमेल बैठाने की असफलता के कारण भी ऐसा हो जाता है।


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पहली सवाक् फिल्म के निर्माता-निर्देशक अर्देशिर को जब सम्मानित किया गया तब सम्मानकर्ताओं ने उनके लिए क्या कहा था? अर्देशिर ने क्या कहा? और इस प्रसंग में लेखक ने क्या टिप्पणी की है? लिखिए।

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मूक सिनेमा में संवाद नहीं होते, उसमें दैहिक अभिनय की प्रधानता होती है। पर जब सिनेमा बोलने लगा तो उसमें अनेक परिवर्तन हुए। उन परिवर्तनों को अभिनेता, दर्शक और कुछ तकनीकी दृष्टि से पाठ का आधार लेकर खोजें, साथ ही अपनी कल्पना का भी सहयोग लें।

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किसी मूक सिनेमा में बिना आवाज के ठहाकेदार हंसी कैसी दिखेगी? अभिनय करके अनुभव कीजिए।

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मूक फिल्म देखने का एक उपाय यह है कि आप टेलीविजन की आवाज बंद करके फिल्म देखें। उसकी कहानी को समझने का प्रयास करें और अनुमान लगाएं कि फिल्म में संवाद और दृश्य की हिस्सेदारी कितनी है?